Sunday, September 20, 2009

भारत के परमाणु परिक्षण बे-लज्जत नही है !


दोस्तों,
पिछले पखवाडे से देश में बड़े जोर से एक बहस चल पड़ी है की ११-०६ १९९८ को अटल बिहारी बाजपेयी सरकार ने डॉक्टर अब्बदुल कलाम के संरक्षण में जो परमाणु परीक्षण कर वाये थे वो सभी व्यर्थ थे या अपर्याप्त फलदायी थे /
भारत में पहला परीक्षण १८-०५-१९७४ को राजस्थान के पोखरण में हुआ था तब श्रीमती इंदिरा गाँधी प्रधानमंत्री थी /वो परीक्षण मकर लग्न में किया गया था जब की दूसरा सिंह लग्न में हुआ /उस परीक्षण कुंडली अनुसार अभी शुक्र महा दशा में राहू चल रहा है /राहू लग्न में केतु के स्टार में है /शुक्र स्वयं के स्टार में है /दोनों का सम्बन्ध लग्न और लाभ से है /
जापान में नागाशाकी और हिरोशिमा पर परमाणु बम ०६ और ०८ अगस्त १९४५ को कर्क लग्न में डाला गया था लाभेश शुक्र जनता के घर का मालिक होकर शनि राहू आदि ग्रहों से १२वे घर में मार खा रहा था उसपर भी लाखो लोग मरे थे /
भारत के पहले परीक्षण की कुंडली अनुसार अभी राहू में चंद्र चल रहा है जो कलह कारी दशा है /
जो एक बात दोनों तीनो परीक्षण कुंडली से स्पस्ट नजर आती है वो है प्रयोग करता को पूर्ण संतुष्टि प्राप्ति का योग सु स्पस्ट नजर आता है लिहाजा मै अपने देश वासियों से स्पस्ट कहना चाहता हूँ की ज्योतिष में कृष्ण मूर्ति पद्धति अनुसार भारत को अपने धेय्य प्राप्ति हो चुकी है और परीक्षणों से जो मिला वो भारत के अनुभव के लिए काफ़ी है लिहाजा विवाद बे-लज्जत है /

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