Sunday, October 25, 2009

भाग्य का साथ नहीं मिलने से भारत हार जाये गा !

दोस्तों,

मालूम होता है की भारतीय क्रिकेट के सितारे गर्दिश में अभी लम्बे समय तक चलेंगे /
महेंद्र सिंह धोनी को अभी और अग्नि परीक्षाओ से गुजरना पड़े गा क्यों की ग्रहों और सितारों की गति अभी भी सुधरती नहीं दिखती / वर्तमान में आस्ट्रेलिया की क्रिकेट टीम जो अपने दम-खम के लिए खूब जानी जाती है सात एक दिवसीय मैचो की श्रंखला खेलने के लिए रिंकी पोंटिंग के नेतृत्व में भारत आ पहुंची है यह वो टीम है जो दवाब में जोर दार प्रदर्शन के लिए जानी जाती है / विश्व रैंकिंग में ऑस्ट्रेलिया की टीम नंबर एक और भारत की टीम नंबर दो पर है , वास्तव में नंबर एक और नंबर दो में प्वाईंट के हिसाब से ज्यादा फासला नहीं है /
खैर , ग्रहों की गति निराली है और इस दफा भी ग्रहों की चाल भारतीय टीम के खिलाफ ही दिखाई पड़ती है / मेरे ज्योतिषीय गणना अनुसार सात मैचो की यह सीरिज ऑस्ट्रेलिया जितने जा रही है यधपि दोनों टीम के बिच अच्छी प्रतियोगिता होगी भारत अच्छी क्रिकेट खेले गा परन्तु जैसा की कह चुका हूँ भाग्य का साथ ऑस्ट्रेलिया को ही मिलेगा /और भारत हार जाये गा  थैंक्स/

Thursday, October 22, 2009

कांग्रेस के सितारे बुलंदी पर है, खुदा पूरी तरह से मेहरबान है


दोस्तों ,
आप कहेंगे मै फिर आत्म प्रशंसा या आत्म प्रवंचना कर रहा हूँ , तो मै कहूंगा नहीं यह मेरी नहीं ज्योतिष शास्त्र की अद्भूत खोज और गुरु देव कृष्ण मूर्ति और उनकी पद्धति की जित है मै तो माध्यम मात्र हूँ / जैसा की आप जानते है आज से कोई एक माह पूर्व मैंने उन्मुक्त स्वर में यह भविष्य वाणी की थी की महाराष्ट्र में एन सी पि और कांग्रेस गठबंधन की सरकार बने गी क्यों की ग्रहों का यही आदेश है / और वो ही हुआ दोनों राजनैतिक दलों ने तीसरी बार सत्ता पर कब्जा जमा लिया है और नो डाउट चीफ मिनिस्टर भी कांग्रेस का ही होगा /,  कांग्रेस के सितारे बुलंदी पर है, खुदा पूरी तरह से मेहरबान है /
साथ ही जैसा की आपको याद हो की मैंने इसी ब्लॉग में इसी लेख में यह भी कहा था की राज ठाकरे की पार्टी इस चुनाव में बड़ा गुल खिलावे गी और उसने वाकई वो ही कर दिखाया की उसने भाजपा और शिवसेना की छोटी होती जा रही जमीं को बस खडे रहने लायक ही बांकी छोडा है / यदि जल्द ही दोनों ने कुछ ना किया तो समय से पनाह मांगते दिखेंगे / यहाँ मै ज्योतिष के आधार पर कहना चाहता हूँ की भावी समय शिवसेना की अग्नि परीक्षा का होगा क्यों की उसके अवरोह का संक्रमण काल शुरू हो चूका है / शिवसेना पर शीघ्र ही मै एक ज्योतिष संबध आलेख पाठको की सेवा में प्रस्तुत करूंगा / इन्तजार करे /थैंक्स/   

लाल किताब ना ज्योतिष है और ना ही तंत्र मंत्र !


दोस्तों,
आम तौर पर कई दफा बहुत सारी बाते जुदा जुदा नहीं देख कर सामूहिक तौर पर देखि जाती है जैसे ''रात'' बोले तो चाँद , अँधेरा , तारे आदि सभी समझ में आते है जब की सभी का जुदा जुदा भी अस्तित्व होता है , ठीक उसी तरह ज्योतिष बोले तो तंत्र मंत्र भी दुम्छ्ले की तरह चिपका चला आता है हमारे जेहन में / ठीक इसी तरह यदि तांत्रिक बोलो तो वो बन्दा भी अंडर स्टूड कर लिया जाता जो भविष्य की भावी बाते भी जानता हो बता भी सकता हो / जब की जमीनी तौर पर दोनों विषय परालौकिक जरूर है परन्तु है बिलकुल जुदा जुदा , बुनियादी तौर पर ज्योतिष में जहेनियत रखने वाला ज्योतिष द्बारा पहचान की गयी परेशानी के कारणों को ख़त्म करने की गरज से तंत्र मंत्र का आश्रय लेता दिख जाता है जो देखने वाले को भुलावे में डाल देता है की ज्योत्षी भी तांत्रिक होते है / लेकिन ज्योतिष पढने वाला हर बन्दा यह बा-खूबी समझता है की ज्योतिष में  वैसा कोई अध्याय नही जिसमे ये लिखा हो की मारण , मोहन और उचातन क्रिया में किस प्रकार निष्णात हुआ जाये / ज्योतिष शास्त्र में पूरी शिद्दत से केवल ज्योतिष याने ग्रह , राशि और तत सम्बन्धी बातो पर ही ध्यान दिया गया है ना की ज्योतिष कोई समस्या बतावे तो उसका तंत्रोक्त विधान भी बखान करे/ ज्योतिष की पराकाष्ठा क्रिशन मूर्ति पद्धति है और वो मानती है की जो भविष्य है वो अविचल  और अविनाशी है लिहाजा किसी तंत्र मंत्र की आवश्यकता नहीं लिहाजा यह पद्धति तंत्र मंत्र के मुक्काम पर पल दो पल भी ठहरती नजर नहीं आती /
ज्योतिष केवल स्थिर रह कर गुजरते वक्त का तथा आनेवाले वक्त को अपनी क्षमता अनुसार कहता भर ही है परन्तु जब आने वाला या गुजर रहा वक्त इन्शान के मन-मुआफिक नहीं होता या आदमी को अपने नुक्सान का अंदेशा बने तो वो तंत्र मंत्र से झमेले का अंत पूछता है और यही वो वक्त होता है जब दोनों पराविद्या आपस में मिल्र रही गुथम गुथा इस कद्दर हो जाती है की दोनों के अस्तित्व अलग देख पाना मुश्किल हो जाता है / परन्तु थोडा और ध्यान से देखे तो जब हम ज्योतिष द्बारा डैग्नोज की गयी समस्या का हल तंत्र द्बारा कर रहे होते है तब भी ज्योतिष निष्क्रिय पड़ा होता है क्रियाशील तो तंत्र मंत्र ही होता है /
तंत्र मंत्र जहाँ अपने उद्देश्य पूर्ति के लिए साधक को यह बतलाता है की वो अपने आराध्य को खुश करने के लिए किन किन वस्तुओ का इस्तेमाल कब कब किस किस प्रकार करे वन्ही ज्योतिष केवल बन्दे की परेशानी बयान कर खामोश हो जाता है /
मैंने अपने २५ वर्षो के ज्योतिष जीवन में ८५ प्रतिशत ज्योतिषियों को तांत्रिक मान्त्रिक होने का ढोंग करते देखा और तांत्रिक मान्त्रिक को भी ज्योतिषी बनने का ढोंग करते पाया /
दोनों का साथ होना जरूरी क्यों १
 दोनों जुदा जुदा अस्तित्व हो कर भी एक दुसरे का पूरक बनने की पुरजोर कोशिश करते नजर आते है शायद इसकी वजह दोनों का एक दुसरे की जरूरत के असले से लैश होना है / दोनों ही अलौकिक अनुभूति से भरे है / स्थूल या पदार्थ रूप में दोनों ही प्रमाण जुटाने में अक्षम है यह कमी या खसूसियत जो भी है दोनों को नजदीक लाती है और बस यही आधुनिक तर्कशील, पदार्थ विश्वासी विज्ञान की आँखों में ज्योतिष और तंत्र मंत्र खटकने लगते है /

Sunday, October 18, 2009

क्या काल का पहिया रूक जाएगा !


दोस्तों, 
पता नहीं  कब से मगर जो एक चर्चा पिछले दिनों से जोर पकड़ती जा रही है वो है'' माया सभ्यता ''द्बारा रचा गया वो कैलेंडर है जिसमे इकीस दिसम्बर सन दो हजार बारह के बाद काल गणना समाप्त हो जाती है यानी दूसरे शब्दों में वो समय आ पहुंचा है जब २१ दिसम्बर को आकाश लाल होगा और आग बरसे गी , पृथ्वी पर चौतरफा हमला होगा / भूकंप , जलजला , आंधी और आग बरसे गी जिसके नतीजे के तौर पर दुनिया में कुछ भी नहीं बचेगा /
आप ही क्यों मै भी सुन पढ़ कर परेशां हो उठा लिहाजा खोज बिन शुरू हो गयी मैंने २१ दिसम्बर २०१२ की सूर्योदय कालीन और संध्या काल की दो कुण्डलिया तैयार कर उस दिन की ग्रह स्थिति का गहन चिंतन किया / क्या काल का पहिया रूक जाएगा १
यह सवाल मैंने दोनों कुन्डालियो में पूछा जवाब मुझे अपेक्षाकृत ही मिला यानी नहीं /
चर्चा और आगे बढे इससे पहले एक एसे तथ्य को मै दोहराना चाहता हूँ जो सारी दुनिया जानती है की दुनिया में ज्योतिष के ज्ञान में भारत से बाहर १० प्रतिशत भी नहीं और जो भी कुछ है वो इतना प्रभावकारी नहीं की भारत के ज्योतिषीय ज्ञान से बढ़कर कोई प्रलय जैसी भयानक आपदा की भविश्यवाणी कर सके / ज्योतिष का ज्ञान हमारे ऋषियों मुनियों ने दैनिक जीवन की प्रत्येक छोटी बड़ी गतिविधियों में बसा दी हुई है उदहारण के लिए जब हम बड़ी छोटी कोई भी पूजा करवाते है तो पंडित पूजा के लिए 'संकल्प' पाठ करता है - ॐ विष्णु विष्णु ....श्री मदभगवतो महापुर्शस्य विष्णोरागया प्रवर्तमानस्य ब्रह्मणों द्वितीय प्रह्राधे श्री श्वेत वाराह कल्पे सप्तमे वैवस्वत मन्वन्तरे अष्टा विन्शतित्मे कलियुगे कलि प्रथम चरणे ......../ ध्यान दे की श्लोक में काल की गणना की जा रही है की यह कलयुग का प्रथम चरण चल रहा है और सम्पुरण कलयुग चार चरणों में पूरा होगा /कलयुग का पूरा मान ४३२००० वर्ष है /जिसका चौथा हिस्सा १०८०० हुआ और अभी वो भी पूरा नहीं हुआ फिर भला महा विनाश का क्या तुक /
२१ दिसम्बर २०१२ रोज शुक्र वार को दिल्ली में सूर्योदय सुबह ०७ बजकर १४ मिनिट पर होगा /उस समय धनु लग्न उदित रहे गा /सूर्य धनु में , चन्द्र मीन में , मंगल मकर में , शनि तुला में, गुरु और केतु वृषभ में , शुक्र बुध और राहू ब्रिश्चिक में होंगे / मेरे चिंतन मनन अनुसार यह एक आम दिनों जैसी एक आम ग्रह स्थिति मालूम देती है / यधपि मेरे पास पिछले ५५ वर्षो में देश में और विदेश में आने वाले सभी बड़े भूकम्पों का ज्योतिषीय ब्योरा उपलब्ध है परन्तु उन उपलब्ध ब्योरो से २१ दिसम्बर २०१२ की ग्रह स्थिति का कोई नाम मात्र भी मिलान नहीं बैठता /


मै अब अधिकार पुर्बक घोषणा करना चाहता हूँ की माया सभ्यता द्वारा की गयी भविष्यवाणी कोरी बकवास से अधिक कुछ नहीं /थैंक्स/      










Friday, October 9, 2009

सात यक्ष प्रश्नों के उत्तर भाग -२


दोस्तों ,

सात यक्ष प्रश्नों के उत्तर के साथ भाग -२ हाजिर है !
एक प्रबुद्ध ब्लॉगर ने यधपि सवाल संगीता पूरी से पूछे थे जो एक विद्वान महिला है /ज्योतिष का उन्हें अपने हिसाब का ज्ञान है /यद्धपि वो खुद को ज्योतिष बयाँ नहीं करती या नहीं मानती और अपनी पद्धति को'' विकसित ''हो रही बताती है लिहाजा उन्हें भी फिर दोष देना यथेष्ट नहीं मालूम पड़ता / दूसरी बात यह है की केवल यक्ष प्रश्न पूछने से बात नहीं बनती जवाब पाने के लिए साधन भी जोड़कर दिए जाने चाहिए थे जो की प्रबुद्ध ब्लॉगर ने दिए नहीं / जन्हा तक मेरा सवाल है मुझे छ सवालों का जवाब देते कही भी हिचक नहीं क्यों की सातवा सवाल शेयर मार्केट से जुडा है तो मैंने आपने अनेक मित्रो से मुंबई में शेयर मार्केट के स्थापना आदि का समय जानना चाह और जो थोडा मालूम हुआ उस आधार पर सशंकित हूँ लिहाजा प्रबुद्ध ब्लॉगर से मेरी प्रार्थना है डाटा उपलब्ध करावे तो मै जानकारी जरूर दूंगा/

राहुल गाँधी की शादी -
१. कुछ महीनो पहले जुलाई में राहुल गाँधी को मैंने उनके जन्म दिन पर इ-मेल द्वारा मेरी लिखी भविष्य वाणी भेजी थी और एक विस्तृत लेख मैंने अपने ब्लॉग में उनकी शादी के बारे में इसी ब्लॉग पर पोस्ट किया था जो आप पढना चाहे तो पुराने पोस्ट में मौजूद है देख ले / खैर , राहुल गाँधी अभी शादी नहीं करेंगे क्यों की उनकी कुंडली अनुसार विवाह में बंधन का योग है / उनकी शादी १७ -०५ -२०११ के बाद ही होगी लिहाजा इस बारे में बाते करना अभी बेकार है /
२. पाकिस्तान और अफगानिस्तान [दोनों के अक्षांसआदि भेद नहीं होने से दोनों समान है ] अगले आतंकवादी हमले के निशाने पर दोनों बिशेष रहें गे / अगला हमला इन्ही दोनों में से किसी पर होगा /
३. सिविल सर्विसेस में टोपर आने वाले विद्यार्थियों के नाम इस वर्ष ''क '' स '' और ''म'' से शुरू होंगे /
४. अफगानिस्तान में युद्धरत नाटो सेना के अधिकतम १४ से अधिक सैनिक शहीद नहीं होंगे, आंकड़े ३१ दिसम्बर २००९ तक के लिए है /
५. ३१ दिसम्बर २००९ को दिल्ली का निम्नतम तापमान ५ से छ डिग्री और अधिकतम १२ डिग्री से ज्यादा नहीं होगा /
६. भारत और चीन के बिच अभी आगामी तिन वर्षो तक युद्ध की कोई ग्रह गति नहीं बनती लिहाजा युद्ध के संयोग बनने पर समय रहते बता देंगे / फिलहाल ब्लॉगर बंधू निश्चिंत रहे / अभी तिन वर्ष कोई डर नहीं /
७. सातवे सवाल के लिए जैसा की मैंने पहले ही कहा था ब्लॉगर बंधू डाटा उपलब्ध करावे तो मै जानकारी जरूर दूंगा , फिर भी यह जरूर लिख रहा हूँ की जल्दी ही सेंसेक्स २००००/- क्रोस कर जायेगा / थैंक्स /


ज्योतिष के आगे सात यक्ष प्रश्न !


दोस्तों ,
पिछले दिनों एक प्रबुद्ध ब्लॉगर ने समस्त भारत के ज्योतिषियों के आगे सात यक्ष प्रश्न रखे थे और चुनौती पेश की थी की वो इन यक्ष प्रश्नों का उत्तर दे कर यह साबित करे की ज्योतिष विज्ञानं है / मै बड़े ही विनम्र तरीके से उनकी चुनौती स्वीकार करता हूँ और अपने प्रभु से प्रार्थना करता हूँ की वे सदा दाहिने हों/ सभी प्रश्नों के उत्तर आगे दूंगा परन्तु साथ ही यह भी कहना चाहता हूँ की ज्योतिष विज्ञानं नहीं है/ यह विज्ञानं हो ही नहीं सकता , हाँ , इतना जरूर है की ज्योतिष में विज्ञानं की कभी कभी झलक मिल सकती है / जैसे चंद्रमा पर पानी मिलना आज भारत समेत नासा भी मान रहा है जब की ज्योतिष शुरू से कहता आ रहा है की चंद्रमा जल तत्व प्रधान ग्रह है उसकी राशिः कर्क है जो भी जल जीवी है / दरसल ज्योतिष सृष्टी के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष सार को समझने का स्वयं सिद्ध साधन है / ज्योतिष के रचयता स्वयं परमात्मा है बांकी ऋषि आदि तो प्रवर्तक मात्र है जो समय अनुसार अपने अनुभव बताते गए है / सृष्टी जीतनी गुय्ह है उस हिसाब से समझने का साधन ज्योतिष भी गुय्ह है अतः उसे विज्ञानं कह कर अपमान नहीं किया जाना चाहिए / विज्ञानं से अभिप्रायः आधुनिक विज्ञानं से है /जो सिमित साधन युक्त है/ जिस तरह क्रोध के समय प्यार और प्यार के समय क्रोध नहीं किया जा सकता ठीक उसी तरह कुछ पुस्तके पढ़ कर ज्योतिष नहीं पाया जा सकता / जिन लोगो ने पाराशरी पढ़ी हो वो जानते होने चाहिए की पुरानी पाराशरी में नारद जी के कहने पर'' देव भूत्वा देव यजेत '' सिद्धांत अपनाते हुए पराशर ऋषि ने गौरी मंत्र को साधने की सलाह दी क्योकि मंत्रो में त्रान की शक्ति है और त्रान से ना केवल शारीर बल्कि आत्म शुद्धि भी होती है / जिसकी आत्म शुद्धि होगी वो ही ज्योतिष को समझे गा ताकि इसकी शक्ति का सही इस्तेमाल किया जा सके / विज्ञानं स्थूल अध्यन करता है ,उसके साधन भी स्थूल है /यह यान भेज कर पिंड के दर्शन कर सकता है परन्तु वो हजारो वर्ष पहले ही ऋषियों ने जैसा कहा उसी तरह मंगल लाल , शुक्र सफ़ेद , बुद्ध हरा ,और गुरु पिला पिंड क्यों निकला / जब की तब दूरबीन की तो कोई सोच भी नहीं सकता था जब ये बाते ऋषियों ने बताई थी / स्थूल क्रिया के पक्ष में ढेरो प्रमाण ईकद्दे किये जा सकते है परन्तु जो सूक्ष्म है वो मनो भावो में तो आ सकता है परन्तु स्थूल अभिव्यक्ति तो भुक्त प्राणी ही अपनी वाणी से दे सकता है लिहाजा ज्योतिष को विज्ञानं बताकर देवताओ की क्रियापद्धति को व्यक्त करने वाली समझ की अनुभूति को जूठा ना करे /शेष फिर / थैंक्स/



Wednesday, October 7, 2009

राहुल गाँधी ; भविष्य का विद्रोही नवयुवक नेता !



दोस्तों,


आज से मै एक सजीदा अभियान को अंजाम देने निकला हूँ, मैंने यह फैसला किया है की राहुल गाँधी पर मै एक ज्योतिषीय विस्तृत आलेख तैयार करू जिसमे उन तमाम पहलू पर ज्योतिष की दृष्टि डालू जो लोगो की नजरो से अलग है यानि उनके भावी भविष्य में क्या दृश्य होंगे मसलन उनकी शादी कब होगी, क्या वो सशक्त प्रधान मंत्री होंगे और उनके विचार क्या है, पारिवारिक जीवन और स्वाभाव क्या है, बच्चे कितने होंगे और कब होंगे, आगे चलकर उनके सम्बन्ध अपनी माता और बहन बहनोई से कैसे रहेंगे / इस किस्म के अनेक प्रश्न पर मै ज्योतिषी के यथा संभव जवाब तैयार करूंगा और बे धडक आपतक इस ब्लॉग के माध्यम से दूंगा / लेख माला कई किस्तों में होगी जो शोध कार्य के साथ प्रकाशित होती रहे गी /

राहुल गाँधी का जन्म मिथुन लग्न में हुआ है यह अत्यंत ही उर्जा से भर पूर लग्न राशिः है लिहाजा राहुल अत्यंत ही उत्साही नवयुवक है और गहरी सोच वाले परन्तु राशिः द्विय स्वाभाव होने से द्विधा के शिकार भी हो जाते है जब की उस द्विधा से बाहर निकलने में लग्न में बैठा मंगल देता है / जैसा की सभी जानते है मंगल साहस और शूरता का प्रतिक है, कृष्ण मूर्ति पद्धति अनुसार राहुल का मंगल खास वजहों से उन्हें विद्रिही बना देता है इस तथ्य को दूसरी तरह से यूं समझे की वो अपने पैतृक जींस की वजह से राजीव गाँधी की तरह विद्रोही है जो यह कहने का साहस रखता की है -'' उनका भेजा एक रुपया जनता तक पहुँचते पहुँचते पंद्रह पैसे रह जाता है''

राहुल को इस किस्म की आतंरिक मजबूती मंगल से मिलती है लिहाजा वो कहने में नहीं हिचकते जो सच्च जनता नेताओ के मुह से सुनना चाहती है / उस सच्च को कहने का जो साहस मंगल ही राहुल को देता है और इस प्रकार उन तमाम नेताओ की जमात से अलग है खड़े नजर आते है जो केवल स्वार्थ साधन के लिए राजनीती में /

मंगल शत्रु भावः का स्वामी है लिहाजा मंगल के दिए गुणों से राहुल के शत्रु ब्याकुल होंगे / राहुल का सच्च उनकी सांस रोक देगा, दूसरी और चुकी मंगल मिथुन लग्न में शुभ नहीं गिना जाता लिहाजा राहुल को भी अपने गुण से कभी भी बाधा हो सकती है शेष फिर /, थैंक्स /

Thursday, October 1, 2009

''पाकिस्तान ने भारत को दो विकेट से हरवाया ''



दोस्तों ,
''पाकिस्तान ने भारत को दो विकेट से हरवाया ''
यह शीर्षक सूनने में अटपटा जरूर है परन्तु है सच्चाई / क्यों की वास्तव में, आस्ट्रेलिया के हांथो दो विकेट से पाकिस्तान क्या हारा भारत की चैम्पियन ट्रोफी में कायम रहने की  तमाम आशाये भी  ख़त्म हो गयी /भारतीय क्रिकेट टीम की स्थिति इतनी बिगड़ चुकी थी की पाकिस्तान जैसे प्रतिस्पर्धी देश का मुहताज होगया था भारत, और उम्मीद करने लगा की पाकिस्तान भारत के बदले आस्ट्रेलिया को हारा दे ताकी भारत प्रतियोगिता में बना रह जाये मगर भारत को पाकिस्तान ने अच्छा सबक सिखाया की वो अपने दुश्मन देश से बेवकूफी भरी उम्मीद ना रखे क्यों की क्रिकेट की नामचीन प्रतियोगिताये यूं नहीं जीती जाती /
दोस्तों ,

मै भी भारत की हार को झेल नहीं पा रहा हूँ / दुखी हूँ / गमगीन हूँ / भारत की हार ने चैम्पियन ट्रोफी का सारा शरूर खत्म कर दिया / पीछे मैंने इसी ब्लॉग में भविष्य वाणी कर दी थी की भारत चैम्पियन ट्रोफी से बे दखल कर दिया जाये गा जो हर बार की तरह बिलकुल ठीक निकली , जो इतेफाक कतई नहीं थी  क्यों की यह ज्योतिष का वो  जायका था जो कृष्ण मूर्ति पद्धति के नाम से जानी जाती है / यह कृष्ण मूर्ति पद्धति की सफलता है / गुरु देव श्री  कृष्ण मूर्ति जी को मेरा सतत प्रणाम जो उन्होंने मुझे माध्यम के रूप में चुना / उन्हें और उनकी पद्धति को मेरा सादर सतत प्रणाम/थैंक्स/