Thursday, October 22, 2009

लाल किताब ना ज्योतिष है और ना ही तंत्र मंत्र !


दोस्तों,
आम तौर पर कई दफा बहुत सारी बाते जुदा जुदा नहीं देख कर सामूहिक तौर पर देखि जाती है जैसे ''रात'' बोले तो चाँद , अँधेरा , तारे आदि सभी समझ में आते है जब की सभी का जुदा जुदा भी अस्तित्व होता है , ठीक उसी तरह ज्योतिष बोले तो तंत्र मंत्र भी दुम्छ्ले की तरह चिपका चला आता है हमारे जेहन में / ठीक इसी तरह यदि तांत्रिक बोलो तो वो बन्दा भी अंडर स्टूड कर लिया जाता जो भविष्य की भावी बाते भी जानता हो बता भी सकता हो / जब की जमीनी तौर पर दोनों विषय परालौकिक जरूर है परन्तु है बिलकुल जुदा जुदा , बुनियादी तौर पर ज्योतिष में जहेनियत रखने वाला ज्योतिष द्बारा पहचान की गयी परेशानी के कारणों को ख़त्म करने की गरज से तंत्र मंत्र का आश्रय लेता दिख जाता है जो देखने वाले को भुलावे में डाल देता है की ज्योत्षी भी तांत्रिक होते है / लेकिन ज्योतिष पढने वाला हर बन्दा यह बा-खूबी समझता है की ज्योतिष में  वैसा कोई अध्याय नही जिसमे ये लिखा हो की मारण , मोहन और उचातन क्रिया में किस प्रकार निष्णात हुआ जाये / ज्योतिष शास्त्र में पूरी शिद्दत से केवल ज्योतिष याने ग्रह , राशि और तत सम्बन्धी बातो पर ही ध्यान दिया गया है ना की ज्योतिष कोई समस्या बतावे तो उसका तंत्रोक्त विधान भी बखान करे/ ज्योतिष की पराकाष्ठा क्रिशन मूर्ति पद्धति है और वो मानती है की जो भविष्य है वो अविचल  और अविनाशी है लिहाजा किसी तंत्र मंत्र की आवश्यकता नहीं लिहाजा यह पद्धति तंत्र मंत्र के मुक्काम पर पल दो पल भी ठहरती नजर नहीं आती /
ज्योतिष केवल स्थिर रह कर गुजरते वक्त का तथा आनेवाले वक्त को अपनी क्षमता अनुसार कहता भर ही है परन्तु जब आने वाला या गुजर रहा वक्त इन्शान के मन-मुआफिक नहीं होता या आदमी को अपने नुक्सान का अंदेशा बने तो वो तंत्र मंत्र से झमेले का अंत पूछता है और यही वो वक्त होता है जब दोनों पराविद्या आपस में मिल्र रही गुथम गुथा इस कद्दर हो जाती है की दोनों के अस्तित्व अलग देख पाना मुश्किल हो जाता है / परन्तु थोडा और ध्यान से देखे तो जब हम ज्योतिष द्बारा डैग्नोज की गयी समस्या का हल तंत्र द्बारा कर रहे होते है तब भी ज्योतिष निष्क्रिय पड़ा होता है क्रियाशील तो तंत्र मंत्र ही होता है /
तंत्र मंत्र जहाँ अपने उद्देश्य पूर्ति के लिए साधक को यह बतलाता है की वो अपने आराध्य को खुश करने के लिए किन किन वस्तुओ का इस्तेमाल कब कब किस किस प्रकार करे वन्ही ज्योतिष केवल बन्दे की परेशानी बयान कर खामोश हो जाता है /
मैंने अपने २५ वर्षो के ज्योतिष जीवन में ८५ प्रतिशत ज्योतिषियों को तांत्रिक मान्त्रिक होने का ढोंग करते देखा और तांत्रिक मान्त्रिक को भी ज्योतिषी बनने का ढोंग करते पाया /
दोनों का साथ होना जरूरी क्यों १
 दोनों जुदा जुदा अस्तित्व हो कर भी एक दुसरे का पूरक बनने की पुरजोर कोशिश करते नजर आते है शायद इसकी वजह दोनों का एक दुसरे की जरूरत के असले से लैश होना है / दोनों ही अलौकिक अनुभूति से भरे है / स्थूल या पदार्थ रूप में दोनों ही प्रमाण जुटाने में अक्षम है यह कमी या खसूसियत जो भी है दोनों को नजदीक लाती है और बस यही आधुनिक तर्कशील, पदार्थ विश्वासी विज्ञान की आँखों में ज्योतिष और तंत्र मंत्र खटकने लगते है /

लाल किताब उपरोक्त तथ्यों पर सहमति की मुहर ही है / इसके रचैता के व्यक्तिगत विचार ही लाल किताब का अस्तित्व है और उससे मै सहमत हूँ या नहीं यह मायने रखने वाली बात नहीं है , मायने तो इस बात का है की रचैता ने ज्योतिष और तंत्र मंत्र का जो गठजोड़ परोसा है उसे लोग बाग़ सहर्ष अपना रहे है / लाल किताब के आधार पर ना तो मौसम की भविष्य वाणी की जा सकती है, ना यह बताया जा सकता है की शेयर मार्केट किस करवट बैठेगा ,अगला प्रधान मंत्री कौन होगा / कब भूकंप होगा , क्रिकेट का मैच कौन जीतेगा / लाल किताब में उसके रचे जाने के बाद से कोई अनुसन्धान नहीं जुडा / उसके कोई सिद्धांत नहीं है / रचैता ने जो कुछ बयान किया उसके कोई मानक नियम बयान नहीं है / जो उसने लिखे उतने किताबी पन्नो के बाद शून्य खोज देखि गयी /
स्पस्ट है की लाल किताब एक कॉकटेल है जो तंत्र मंत्र और ज्योतिष की लूट खसोट कर के तैयार हुई है /थैंक्स/