Friday, October 9, 2009

ज्योतिष के आगे सात यक्ष प्रश्न !


दोस्तों ,
पिछले दिनों एक प्रबुद्ध ब्लॉगर ने समस्त भारत के ज्योतिषियों के आगे सात यक्ष प्रश्न रखे थे और चुनौती पेश की थी की वो इन यक्ष प्रश्नों का उत्तर दे कर यह साबित करे की ज्योतिष विज्ञानं है / मै बड़े ही विनम्र तरीके से उनकी चुनौती स्वीकार करता हूँ और अपने प्रभु से प्रार्थना करता हूँ की वे सदा दाहिने हों/ सभी प्रश्नों के उत्तर आगे दूंगा परन्तु साथ ही यह भी कहना चाहता हूँ की ज्योतिष विज्ञानं नहीं है/ यह विज्ञानं हो ही नहीं सकता , हाँ , इतना जरूर है की ज्योतिष में विज्ञानं की कभी कभी झलक मिल सकती है / जैसे चंद्रमा पर पानी मिलना आज भारत समेत नासा भी मान रहा है जब की ज्योतिष शुरू से कहता आ रहा है की चंद्रमा जल तत्व प्रधान ग्रह है उसकी राशिः कर्क है जो भी जल जीवी है / दरसल ज्योतिष सृष्टी के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष सार को समझने का स्वयं सिद्ध साधन है / ज्योतिष के रचयता स्वयं परमात्मा है बांकी ऋषि आदि तो प्रवर्तक मात्र है जो समय अनुसार अपने अनुभव बताते गए है / सृष्टी जीतनी गुय्ह है उस हिसाब से समझने का साधन ज्योतिष भी गुय्ह है अतः उसे विज्ञानं कह कर अपमान नहीं किया जाना चाहिए / विज्ञानं से अभिप्रायः आधुनिक विज्ञानं से है /जो सिमित साधन युक्त है/ जिस तरह क्रोध के समय प्यार और प्यार के समय क्रोध नहीं किया जा सकता ठीक उसी तरह कुछ पुस्तके पढ़ कर ज्योतिष नहीं पाया जा सकता / जिन लोगो ने पाराशरी पढ़ी हो वो जानते होने चाहिए की पुरानी पाराशरी में नारद जी के कहने पर'' देव भूत्वा देव यजेत '' सिद्धांत अपनाते हुए पराशर ऋषि ने गौरी मंत्र को साधने की सलाह दी क्योकि मंत्रो में त्रान की शक्ति है और त्रान से ना केवल शारीर बल्कि आत्म शुद्धि भी होती है / जिसकी आत्म शुद्धि होगी वो ही ज्योतिष को समझे गा ताकि इसकी शक्ति का सही इस्तेमाल किया जा सके / विज्ञानं स्थूल अध्यन करता है ,उसके साधन भी स्थूल है /यह यान भेज कर पिंड के दर्शन कर सकता है परन्तु वो हजारो वर्ष पहले ही ऋषियों ने जैसा कहा उसी तरह मंगल लाल , शुक्र सफ़ेद , बुद्ध हरा ,और गुरु पिला पिंड क्यों निकला / जब की तब दूरबीन की तो कोई सोच भी नहीं सकता था जब ये बाते ऋषियों ने बताई थी / स्थूल क्रिया के पक्ष में ढेरो प्रमाण ईकद्दे किये जा सकते है परन्तु जो सूक्ष्म है वो मनो भावो में तो आ सकता है परन्तु स्थूल अभिव्यक्ति तो भुक्त प्राणी ही अपनी वाणी से दे सकता है लिहाजा ज्योतिष को विज्ञानं बताकर देवताओ की क्रियापद्धति को व्यक्त करने वाली समझ की अनुभूति को जूठा ना करे /शेष फिर / थैंक्स/