Friday, December 25, 2009

शुक्र है खुदा का की इन गोरी चमड़ी वालो को इतनी तो अक्ल आई !


www.blogvani.comदोस्तों ,
नेचर जर्नल नामक पत्रिका, जो अमेरिका में प्रकाशित होती है,ने अपनी रिपोर्ट में कबूल किया है की हमारी पृथ्वी बहूत अंदर तक,तक़रीबन 15 मिल अंदर तक, सूर्य और चन्द्रमा के गुरूत्वाकर्षण से प्रभावित होती है यानि इसी के प्रभाव वश भूकंपीय झटके आते है / हुआ दरअसल यह की अमेरिका के बर्कले स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफोर्निया के अर्थ एंड प्लानेट्री साईंस ने गहन अध्यन के बाद निष्कर्ष बताया की पिछले वर्ष सुमात्रा में आये  भूकंप के बाद जो  वाशिंगटन स्टेट के तटीय इलाको में भी जो झटके महसूस किये गए वो दूसरे ग्रहों से निकली तरंगो की वजह से थे /
अमेरिकी भूकंपीय विशेषज्ञों का कहना है की ग्रहों के गुरूत्वाकर्षण के फलस्वरूप पृथ्वी मिलो अंदर तक प्रभावित होती है यानी पृथ्वी के अंदर पिघलते मैग्मा पर प्रभाव पड़ता है और एक प्रतिक्रिया का क्रमवार सिलसिला चल पड़ता है जो भारी तबाही का सबब बनता है / इसका विस्तृत अध्ययन लॉस ईन्जिलास के पश्चिमोत्तर क्षेत्र के 170 मिल के इलाके में पिछले आठ सालो में आये करीब 2000  झटको के साथ जोड़ कर किया गया /
अन्य संदर्भ में एक अन्य सत्य जो अभी कुछ दिनों पहले उजागर हुआ और वो भी भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा की चन्द्रमा पर जल का अस्तित्व है जिसे अमेरिका स्थित ''नासा'' ने भी कबूल लिया / उक्त खबर को टीवी चैनलों ने खासम-ख़ास तवज्जो दी थी / भारत अपनी खोज की पुष्टि नासा द्वारा किये जाने पर फूला नहीं समाया था और वास्तव में है भी यह गौरब की बात, परन्तु मै आज तक न्याय नहीं दे पाया  इस खोज को क्यों की भारतीय ज्योतिष अपने प्रारम्भ से ही कहता आ रहा है की चन्द्रमा एक जलतत्व प्रधान ग्रह है परन्तु अब जब गोरी चमड़ी ने कबूल लिया तो हम फूले नहीं समा रहे /
ज्योतिष ने बहूत पहले कहा की ग्रहों की गुरूत्वाकर्षण शक्ति पृथ्वी में भूकंपन पैदा करती और यही वजह है की जब सूर्य या चन्द्र ग्रहण होता है उसके बाद दो या तिन महीनो में भूकंप जरूर आता है आप चाहे जैसे मर्जी हो इस तथ्य को जांच ले यह सत्य साबित होगा /
शुक्र है खुदा का की इन गोरी चमड़ी वालो को  इतनी तो अक्ल आई की कम से कम उन्हों ने भारतीय लोगो को खुद के घर में रखी मुर्गी को दाल बराबर नहीं समझने पर विवस कर दिया है / थैंक्स/    

5 comments:

निशांत मिश्र - Nishant Mishra said...

पृथ्वी केवल कुछ मील ही नहीं बल्कि केंद्र तक सूर्य और चन्द्रमा के गुरुत्व से प्रभावित होती है. केंद्र में सैंकड़ों किलोमीटर तक पिघले लोहे और निकल का गोला है जो पृथ्वी के चुम्बकत्व का कारण है.
वैसे, सूर्य और चन्द्र तो बहुत बड़े या समीप हैं, लेकिन दुसरे गृह और नक्षत्र (जिनमें से कुछ काल्पनिक भी है) पृथ्वी और मनुष्यों के जीवन को कैसे प्रभावित करते हैं इसका संतोषजनक उत्तर मुझे आज तक नहीं मिल पायाहै.

Udan Tashtari said...

चलिए, माना तो..हम भी आपके साथ थैंक्स कह देते हैं.

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

गोरी चमडी वाले तो बेशक स्वीकार कर भी लें...लेकिन ये जो अपने ही धर में काले अंग्रेज बैठे हैं, इन कूपमन्डूकों की समझ में ये बातें नहीं आ सकती ।

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

Achchha hai.

--------
क्या आपने लोहे को तैरते देखा है?
पुरुषों के श्रेष्ठता के 'जींस' से कैसे निपटे नारी?

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

ज्योतिष एक सत्य विद्या है।
दम्भी लोग इसे अन्ध-विश्वास और और न जाने क्या-क्या नाम देते हैं?
दुनिया की परवाह न करते हुए,
आप इस साधना मे संलग्न रहें।
शुभकामनाओं सहित-