Thursday, November 12, 2009

ज्योतिष में ''आफ्टर मैथ'' का महत्त्व

दोस्तों,

आज  के दौर में ज्योतिष सन्दर्भ में नित नए प्रयोग किये जाते है अब एक उदाहरण यह भी है की भारत ही क्यों विश्व में कही भी कोई प्राकृतिक या गैर प्राकृतिक विपदा घटित हो जाये तो कुम्भ करनी नींद में सोया पड़ा ज्योतिष समुदाय एक दम से जग उठता है और उस विपदा की ग्रह स्थैतिक विश्लेषण लेकर उधम मचानी शुरू कर देता है और दावे यह पेश किये जाते है की उक्त घटना तो अवशम्भावी थी क्यों की ग्रह योग उक्त इशारा देते आ रहे थे / निसंदेह इस किस्म की आफ्टर मैथ ग्रहों द्वारा अपनाई गयी विशेष ग्रह प्रणाली को समझ पाने के लिए किसी ज्योतषी की व्यक्तिगत सूझबूझ बढ़ने में खूब फायदाबख्श हो सकते है परन्तु आमोखाश को इससे क्या मिला यह स्पस्ट नहीं हो ता , जनता तो यह जान कर ही संतुस्ट होती है की अमुक दुर्घटना अमुक तारीख को होगी और वह सचेत रहे /   मेरी समझ में ''आफ्टर मैथ'' [बाद का लेखाजोखा ] यूं भी बेकार है क्यों की जिस ग्रह स्थिति में एक दफा कोई घटना घटित होजाए उस फार्मूले पर दूसरी दफा भी घटना घटित होजयेगी यह सोचना ज्योतिषीय भूल साबित होगी क्योकि ज्योतिष में कोई एसा स्थापित साँचा नहीं है की अमुक ग्रह स्थिति आने पर भूकंप ही आयेगा यदि एसा होता तो ज्योतिष की पुँछ पकड़कर कोई भी ऐरा गेरा नथू खैरा भी दो में दो जोड़ कर परम ज्योतिषी बन गया होता / मैंने व्यक्तिगत अनुभव में पाया की जिस ग्रह सेटअप में कोई धनकुबेर बना तो वैसी ही दुसरे सेटअप में दूसरा बन्दा भीख मांगता मिला, अब यहाँ आप यह सवाल उठा सकते है की यदि मेरी बात सच्च है तो भृगु संहिता या अन्य दूसरी संहितओं में जो फलाफल लोगो को सच्च में मिल जाता है वो फिर कैसे क्या ग्रहों का सेटअप नहीं है मै यह कहना चाहता हूँ की जो पराशर पद्धति सहारा लेकर ''आफ्टर मैथ '' बयान किया जाता है और भृगु जैसी संहिता जो तथ्य सामने रखती है दोनों में जमीं और आश्मान जैसा फर्क है -भृगु संहिता नाडियों पर अपनी गणना प्रस्तुत करती है जब की पराशर पद्धति विशुद्ध ग्रह की स्थूल गणना पर चलती है यही पराशर जन्हा नंगी आँखों से आकाश ताकता है वन्ही भृगु संहिताये थोड़े आगे बढ़ कर दूरबीन से सितारों को देख कर अपने फलाफल बयान करता है परन्तु है दोनों ही अपूरण / वस्तुतः प्रकृति जो कोई घटना जिस किसी ग्रह स्थिति में एक बार घटित कर देती है वो ग्रह स्थिति वापस नहीं आती यही वजह है की नित नयी ग्रह स्थिति अनेक मगर एक ही वायु यान दुर्घटना के लिए लागू हो जाती है यानि रिजल्ट तो रेल दुर्घटना है मगर प्रत्येक दुर्घटना अलग अलग ग्रह स्थिति में होती है यही वजह है की ज्योतिषी भूल कर बैठता है वो कहता है वायुयान दुर्घटना होगी जब की उस समय पर कोई वायुयान कंपनी अपना फायदा दुनिया को गिना रही होती है / यानि प्रकृति किसी वायुयान दुर्घटना के लिए किसी एक ही किस्म की ग्रह स्थिति की मुहताज नहीं है उसके काम कराने का तरिका बदलता रहता है लिहाजा ज्योतिषी जो प्रश्न का जवाब रट कर रखता है वो प्रश्न पूछा ही नहीं जाता अस्तु'' आफ्टर मैथ '' बेकार है / शेष फिर / थैंक्स/