Tuesday, December 1, 2009

हाय शादी का संग करू !


दोस्तों!
हम जिस किसी भी समाज में हो उसकी बदलती तासीर हमारे जीवन पर बे-हिसाब असर डालती है / हम लाख कोशिशो की बावजूद उस के असर से अलहद नहीं रह सकते / आज हमारे आपके घरो में एसे शादी लायक लड़के / लडकियों की काफी अच्छी तादाद मिलजाए गी जो रिश्तो के लिए भटक रहे है मगर रिश्ते दरवाजे तक नहीं आते/ वजह चाहे जो हो रिश्ते नहीं होने की/ पर हर समाज में कुंवारो की भारी फौज जमा हो रखी है , वो मारवाड़ी, पंजाबी, मराठी या जिस किसी समाज की बात हो हर जगह ये ही हाल है / मै ज्योतिषी हूँ और दिल्ली जैसे शहर में हूँ जंहा सभी समुदाय के लोगबाग है, मिलते है तो जो कॉमन मसला है वो कुंवारे बच्चो का है जो शादी की उम्र ना जाने कब पार कर चुके है / यह एक गंभीर मसला है जो दिनानुदिन भयावह शक्ल अख्तियार कर रहा है /  मै वजहों की चर्चा नहीं करना चाहता क्यों की उन्हें सुधारना मेरी उरमा या कूबत से बाहर है परन्तु इतना तो जरूर कहूंगा की इसकी मुख्य बाजूहात वो कुरीतियाँ  और लालसा है जो समाज के तानेबाने को तहसनहस कर रही है /
खैर, एक सरल और सहज समझा जा सकने वाला उद्धरण राहुल गांधी का लेले जो हर नजरिये से सुयोग्य वर कहे जायेंगे, मै समझता हूँ वो जिस किसी परिवार में विवाह की इक्छा जतावें तो निश्चय ही वधु पक्ष सहर्ष स्वीकार लेगा, मगर हाय रे विधाता उस लाखो के प्यारे कुंवारे की घुड चढ़ी नहीं हो पा रही/ इसके पीछे क्या वजूहात है और उस जैसा वर क्यों कर कुंवारा डोल रहा है /

मसला वो नहीं जो दिखता है / मै ज्योतिषी हूँ लिहाजा मै ज्योतिष की बात करूंगा / मै नौ ग्रहों की बात करूंगा / कृष्ण मूर्ति पद्धति मांगलिक दोष ; पाप ग्रह की सप्तम पर दृष्टि , या अन्य दूसरे पाराशर पद्धति द्वारा बखान किये सैकड़ों योगो को पुरजोर खारिज करती है / केपी पराशर के चंचल सिद्धांतो को ''गए थे हरी भजन को ओटन लगे कपास'' से अधिक कुछ नहीं मानता/ शेष फिर , थैंक्स /                                                                                                                       www.blogvani.com