Wednesday, January 13, 2010

तलवार की धार पर चलने वाले लोग !


www.blogvani.comदोस्तों,
दुनिया में बहुतायत में एसे पेशे है जंहा '' अभी नहीं तो कभी नहीं '' जैसी शर्ते रिजक कमाने के साथ जुडी होती है जो इस शर्त की भरपाई कर सकते वो कमाते है बांकी मुंह-दराजी करते रह जाते है और एक  नजूमी पेशा बन्दे के साथ भी यही शर्त कुछ ज्यादा ही  शिद्दत से जुडी होती है / इन चंद लाईनों में ही उन लोगो के पेशे का फ़साना भी छुपा है जो ज्योतिष के पेशे में है /
आपने एक ज्योतिषी को अपनी कुंडली जांचने के लिए दी नहीं की नजूमी तो चढ़ गया ''सान'' पे, क्यों की यदि ज्योतिषी वो सब बताने में कामयाब नहीं हुआ जो उसकी सच्चाई है तो सीधा नतीजा ये लिया जाए गा वो ज्ञानी नहीं / जबकि बहुदा सत्य जुदा किस्म का होता है परन्तु नजूमी को कोई दूसरा मौक़ा मुहैया नहीं होता /
मै दो वाकिये बयान करता हूँ , पहला 1996 का है जब मै अपने किसी मित्र के साथ उसी की ओफीस में बैठा था /तभी किसी राज्य स्तरीय नेता के कदम वंहा पड़े / मेरे मित्र ने मुझे मौक़ा देख ऑफिस से बाहर बुलाकर कहा - शशि ! मौक़ा अच्छा है / यह यह अमुक केन्द्रीय नेता का पुत्र है / मै तुम्हे मिलवाता हूँ , तुम कोई भविष्य वाणी उसके बाबत करो /
मैंने प्रतिवाद किया की मै अभी उससे निपटने के लिए तैयार होकर नहीं आया /
मित्र ने कहा -'' अभी नहीं तो कभी नहीं !''
हार कर मैंने हथ्थियार डाल दिए / यह जुदा बात है की मैंने उसे जीतनी भी भविष्य वाणी की सभी सच्च साबित हुयी और हमारे रिश्ते खूब फले फूले परन्तु ज़रा कल्पना करे यदि मेरी भविष्य वानिया असफल रहती तो क्या वो मुझे घांस डालता !
दूसरा वाकिया इससे भी पहले का है /
गाजियाबाद में गैस स्टोव निर्माता से किसी सज्जन ने मेरी मुलाक़ात करवाई / मैंने कुंडली देखकर कहा -आपका शनि अच्छा नहीं और इसी की महादशा चालू है निकट भविष्य में आपका फ़ार्म फेल हो जाए गा / सुनकर वो बंधू हँसे और बोले '' शशि जी जब से यह शनि [ चार वर्ष पहले से ] की दशा लगी है मै दिन दूना और रात चौगुना तरक्की कर रहा हूँ /
सुनकर मेरी स्थिति यूं थी की काटो तो खून नहीं /
आज सन 2010 चल रहा है वो निर्माता मुझे वापिस फिर नहीं मिला /
इस घटना ने मुझे भारी सदमा दिया / जीवन व्यर्थ लगाने लगा / भूल विद्या में थी या मेरे में यह समझना जरूरी था /
फिर क्या हुआ यह लम्बी और यायावरी दास्ताँ है / तजुर्बा ये निकला की पाराशर पद्धति के सिद्धांत बड़े अलबेले है / जिसकी राशि है वो कमतर है और जो बाहर से आ बैठा है वो उंच का है यानी दूसरे शब्दों में यूं कहे जिसका मकान वो खानाबदोश और जो खानाबदोश सचमुच है वो शहंशाह बना बैठा है /
इन विसंगतियों ने मेरा मोहभंग कर दिया /
आखिरी बात जो मै बड़े लाबोलुआब से कहना चाहता हूँ की ज्योतिष का पेशा वो वाहिद पेशा है जंहा मान सम्मान और अपमान जलालत दोनों बड़ी फराकदिली से पायी जाती है जब की वो अलग फलसफा है की समाज ज्ञानियों को जूते मारने के बाद ही पूजता है /
थैंक्स/